अथर्ववेद (कांड 20)
सम॑स्य म॒न्यवे॒ विशो॒ विश्वा॑ नमन्त कृ॒ष्टयः॑ । स॑मु॒द्राये॑व॒ सिन्ध॑वः ॥ (१)
कर्म करने वाले इंद्र के लिए सभी प्रजाएं उसी प्रकार झुकती हैं, जिस प्रकार समुद्र के लिए सभी नदियां झुक कर चलती हैं. (१)
All the subjects bow down to Indra, who does karma, in the same way as all the rivers bend for the sea. (1)