अथर्ववेद (कांड 20)
त्वे क्रतु॒मपि॑ पृञ्चन्ति॒ भूरि॒ द्विर्यदे॒ते त्रिर्भ॑व॒न्त्यूमाः॑ । स्वा॒दोः स्वादी॑यः स्वा॒दुना॑ सृजा॒ सम॒दः सु मधु॒ मधु॑ना॒भि यो॑धीः ॥ (६)
ये वीर जन्म के संस्कार तथा युद्ध की दीक्षा लेने के कारण त्रिजन्म अर्थात् तीन बार जन्म लेने वाले कहलाते हैं. इन वीरों को स्वादिष्ट पदार्थो वाला बनाओ. हे इंद्र! तुम इन वीरों में प्रवेश कर के संग्राम में तत्पर बनो. (६)
These heroes are called trijanma i.e. three-time takers due to the rites of birth and taking initiation of war. Make these heroes delicious. O Indra! You enter these heroes and be ready in the struggle. (6)