हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.117.1

कांड 20 → सूक्त 117 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 117
पिबा॒ सोम॑मिन्द्र॒ मन्द॑तु त्वा॒ यं ते॑ सु॒षाव॑ हर्य॒श्वाद्रिः॑ । सो॒तुर्बा॒हुभ्यां॒ सुय॑तो॒ नार्वा॑ ॥ (१)
हे इंद्र! हम जिस सोमरस को पत्थरों के द्वारा संस्कारित करते हैं, वह तुम्हें तृप्त करे. इस का संस्कार करने वाले के हाथ में पत्थर है. हे इंद्र! तुम इस सोमरस का पान करो. (१)
O Indra! May the Somerasa that we cultivate with stones satisfy you. The person who performs this has a stone in his hand. O Indra! You drink this someras. (1)