हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.119.2

कांड 20 → सूक्त 119 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 119
तु॑र॒ण्यवो॒ मधु॑मन्तं घृत॒श्चुतं॒ विप्रा॑सो अ॒र्कमा॑नृचुः । अ॒स्मे र॒यिः प॑प्रथे॒ वृष्ण्यं॒ शवो॒ऽस्मे सु॑वा॒नास॒ इन्द॑वः ॥ (२)
इस यजमान का धन बढ़ता है और इस के लिए बल प्राप्त होता है. इंद्र के लिए सोमरस सिद्ध किया जाता है. शीघ्रता करने वाले ब्राह्मण पूजा संबंधी मंत्रों से इंद्र की प्रशंसा करते हैं. (२)
The wealth of this host increases and it gets strength for it. Someras is proved for Indra. Quick Brahmins praise Indra with puja mantras. (2)