हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.125.4

कांड 20 → सूक्त 125 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 125
यु॒वं सु॒राम॑मश्विना॒ नमु॑चावासु॒रे सचा॑ । वि॑पिपा॒ना शु॑भस्पती॒ इन्द्रं॒ कर्म॑स्वावतम् ॥ (४)
हे अश्चिनीकुमारो! नमुचि राक्षस के साथ इंद्र का युद्ध होते समय तुम ने आनंदित करने वाला सोमरस पी कर इंद्र की रक्षा की थी. (४)
O Ashchini Kumaro! During Indra's war with namuchi rakshasa, you protected Indra by drinking the blissful someras. (4)