हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 125
अपे॑न्द्र॒ प्राचो॑ मघवन्न॒मित्रा॒नपापा॑चो अभिभूते नुदस्व । अपोदी॑चो॒ अप॑ शूराध॒राच॑ उ॒रौ यथा॒ तव॒ शर्म॒न्मदे॑म ॥ (१)
हे धन के स्वामी इंद्र! तुम पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण-चारों दिशाओं से हमारे शत्रुओं को रोको. इस प्रकार हम तुम्हारे द्वारा दिए हुए सुख से सुखी हो सकेंगे. (१)
O Swami of Wealth Indra! You stop our enemies from all four directions east, west, north, south. In this way, we will be happy with the happiness given by you. (1)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 125
कु॒विद॒ङ्ग यव॑मन्तो॒ यवं॑ चि॒द्यथा॒ दान्त्य॑नुपू॒र्वं वि॒यूय॑ । इ॒हेहै॑षां कृणुहि॒ भोज॑नानि॒ ये ब॒र्हिषो॒ नमो॑वृक्तिं॒ न ज॒ग्मुः ॥ (२)
हे अग्नि! जिस प्रकार संपन्न कृषक जौ के बहुत से पौधों को मिला कर काटते हैं, उसी प्रकार तुम हवि से युक्त कुशों का सेवन करो. (२)
O agni! Just as rich farmers cut many plants of barley together, in the same way you should eat kushas with havi. (2)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 125
न॒हि स्थूर्यृ॑तु॒था या॒तम॑स्ति॒ नोत श्रवो॑ विविदे संग॒मेषु॑ । ग॒व्यन्त॒ इन्द्रं॑ स॒ख्याय॒ विप्रा॑ अश्वा॒यन्तो॒ वृष॑णं वा॒जय॑न्तः ॥ (३)
युद्धों में हमें अन्न प्राप्त नहीं हुआ. फसलें पकने के समय भी हमें आवश्यकता के अनुसार अन्न प्राप्त नहीं हुआ. इस कारण हम अपने मित्र इंद्र की कामना करते हुए अश्व, गौ तथा अन्न मांगते हैं. (३)
We did not get food in wars. Even at the time of ripening of the crops, we did not get food as per the requirement. For this reason, we ask for horses, cows and food while wishing our friend Indra. (3)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 125
यु॒वं सु॒राम॑मश्विना॒ नमु॑चावासु॒रे सचा॑ । वि॑पिपा॒ना शु॑भस्पती॒ इन्द्रं॒ कर्म॑स्वावतम् ॥ (४)
हे अश्चिनीकुमारो! नमुचि राक्षस के साथ इंद्र का युद्ध होते समय तुम ने आनंदित करने वाला सोमरस पी कर इंद्र की रक्षा की थी. (४)
O Ashchini Kumaro! During Indra's war with namuchi rakshasa, you protected Indra by drinking the blissful someras. (4)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 125
पु॒त्रमि॑व पि॒तरा॑व॒श्विनो॒भेन्द्रा॒वथुः॒ काव्यै॑र्दं॒सना॑भिः । यत्सु॒रामं॒ व्यपि॑बः॒ शची॑भिः॒ सर॑स्वती त्वा मघवन्नभिष्णक् ॥ (५)
हे इंद्र! तुम ने शोभा धारण करने वाला सोमरस पिया है. सरस्वती देवी अपनी विभूतियों से तुम्हें सींचे. (५)
O Indra! You have drunk the graceful Someras. May Saraswati Devi water you with her personalities. (5)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 125
इन्द्रः॑ सु॒त्रामा॒ स्ववाँ॒ अवो॑भिः सुमृडी॒को भ॑वतु वि॒श्ववे॑दाः । बाध॑तां॒ द्वेषो॒ अभ॑यं नः कृणोतु सु॒वीर्य॑स्य॒ पत॑यः स्याम ॥ (६)
रक्षक एवं ऐश्वर्य वाले इंद्र अपने रक्षा साधनों से हमें सुख प्रदान करें. ये शक्तिशाली इंद्र हमारे शत्रुओं का वध कर के हमारा भय दूर करें. हम उत्तम और प्रभाव पूर्ण धन से संपन्न हों. (६)
May Indra, the protector and the one with wealth, give us happiness through his defense means. May this powerful Indra remove our fear by killing our enemies. May we be blessed with good and effective wealth. (6)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 125
स सु॒त्रामा॒ स्ववाँ॒ इन्द्रो॑ अ॒स्मदा॒राच्चि॒द्द्वेषः॑ सनु॒तर्यु॑योतु । तस्य॑ व॒यं सु॑म॒तौ य॒ज्ञिय॒स्यापि॑ भ॒द्रे सौ॑मन॒से स्या॑म ॥ (७)
रक्षा करने वाले इंद्र हमारे शत्रुओं को दूर से ही भगा दें. यश के योग्य उन इंद्र की कृपामयी बुद्धि में रहते हुए हम सब उन की मंगलकारी भावना प्राप्त करें. (७)
May Indra, who protects, drive away our enemies from a distance. While living in the graceful intellect of Indra, worthy of fame, let us all get his auspicious feeling. (7)