हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.125.6

कांड 20 → सूक्त 125 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 125
इन्द्रः॑ सु॒त्रामा॒ स्ववाँ॒ अवो॑भिः सुमृडी॒को भ॑वतु वि॒श्ववे॑दाः । बाध॑तां॒ द्वेषो॒ अभ॑यं नः कृणोतु सु॒वीर्य॑स्य॒ पत॑यः स्याम ॥ (६)
रक्षक एवं ऐश्वर्य वाले इंद्र अपने रक्षा साधनों से हमें सुख प्रदान करें. ये शक्तिशाली इंद्र हमारे शत्रुओं का वध कर के हमारा भय दूर करें. हम उत्तम और प्रभाव पूर्ण धन से संपन्न हों. (६)
May Indra, the protector and the one with wealth, give us happiness through his defense means. May this powerful Indra remove our fear by killing our enemies. May we be blessed with good and effective wealth. (6)