अथर्ववेद (कांड 20)
सं॑हो॒त्रं स्म॑ पु॒रा नारी॒ सम॑नं॒ वाव॑ गच्छति । वे॒धा ऋ॒तस्य॑ वी॒रिणीन्द्र॑पत्नी महीयते॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (१०)
यज्ञ में नारी पुरुष के साथ सहयोगिनी के रूप में बैठती है. इस प्रकार वह यज्ञ की रचना करने वाली है. वह वीर पत्नी इंद्राणी की स्तुति के योग्य है, क्योंकि इंद्र श्रेष्ठ हैं. (१०)
In the yajna, the woman sits with the man as a companion. In this way, she is going to create the yajna. He deserves the praise of veer wife Indrani, because Indra is superior. (10)