हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 126
वि हि सोतो॒रसृ॑क्षत॒ नेन्द्रं॑ दे॒वम॑मंसत । यत्राम॑दद्वृ॒षाक॑पिर॒र्यः पु॒ष्टेषु॒ मत्स॑खा॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (१)
वृषाकपि देव ने इंद्र को देवता के समान समझा. वे वृषाकपि पुष्टयों के पालनकर्ता तथा मेरे मित्र हैं. हे इंद्र! इस कारण मैं उत्तम हूं. (१)
Vrishakpi Dev considered Indra as a god. They are the sustainers of the test and my friends. O Indra! That's why I'm good. (1)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 126
परा॒ हीन्द्र॒ धाव॑सि वृ॒षाक॑पे॒रति॒ व्यथिः॑ । नो अह॒ प्र वि॑न्दस्य॒न्यत्र॒ सोम॑पीतये॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (२)
हे इंद्र! तुम वृषाकपि की अपेक्षा अधिक वेग वाले हो. तुम शत्रुओं को व्यथित करने में समर्थ हो. जहां सोमपान का साधन नहीं होता, वहां तुम नहीं जाते हो. इस प्रकार इंद्र सब से बढ़ कर हैं. (२)
O Indra! You are more at a faster pace than Taurus. You are capable of disturbing enemies. Where there is no means of sompan, you do not go there. Thus Indra is the most important. (2)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 126
किम॒यं त्वां॑ वृ॒षाक॑पिश्च॒कार॒ हरि॑तो मृ॒गः । यस्मा॑ इर॒स्यसीदु॒ न्वर्यो वा॑ पुष्टि॒मद्वसु॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (३)
हे इंद्र! इन वृषाकपि ने तुम्हें हरे रंग का मृग वयों बनाया है? तुम इन्हें पुष्टिकारक अन्न प्रदान करते हो. इस प्रकार इंद्र सब से बढ़ कर हैं. (३)
O Indra! Have these scorpions made you a green deer? You provide them with confirmatory food. Thus Indra is the most important. (3)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 126
यमि॒मं त्वं वृ॒षाक॑पिं प्रि॒यमि॑न्द्राभि॒रक्ष॑सि । श्वा न्व॑स्य जम्भिष॒दपि॒ कर्णे॑ वराह॒युर्विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (४)
हे इंद्र! तुम जिन वृषाकपि का पालन करते हो, क्या वाराह पर आक्रमण करने वाला कुत्ता उस के कान पर काट लेता है? इस प्रकार इंद्र सब से बढ़ कर हैं. (४)
O Indra! Does the dog that attacks Varaha bite his ear? Thus Indra is the most important. (4)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 126
प्रि॒या त॒ष्टानि॑ मे क॒पिर्व्य॑क्ता॒ व्यदूदुषत् । शिरो॒ न्वस्य राविषं॒ न सु॒गं दु॒ष्कृते॑ भुवं॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (५)
वृषाकपि ने मेरे स्नेही जनों को दुर्बल बनाया है तथा व्यक्ता ने उन्हें दोषी किया है. बुरे कार्य में प्रकट होना सुगम नहीं होता. इसलिए मैं इस के शीश को शब्द वाला बनाता हूं. इस प्रकार इंद्र सब से उत्कृष्ट हैं. (५)
Vrushakpi has made my loved ones weak and the person has blamed them. It is not easy to appear in bad work. That's why I make this glass word. Thus Indra is the best of all. (5)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 126
न मत्स्त्री सु॑भ॒सत्त॑रा॒ न सु॒याशु॑तरा भुवत् । न मत्प्रति॑च्यवीयसी॒ न सक्थ्युद्य॑मीयसी॒ विश्व॑स्मादिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (६)
मेरी पत्नी से अधिक न कोई स्त्री सौभाग्य वाली है और न कोई अधिक सुखी तथा उत्तम संतान वाली है. कोई स्त्री उससे अधिक अपने पति को सुख देने वाली भी नहीं है. (६)
No woman is more fortunate than my wife and no one is more happy and better child. No woman is more happy than her husband. (6)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 126
उ॒वे अ॑म्ब सुलाभिके॒ यथे॑वा॒ङ्ग भ॑वि॒ष्यति॑ । भ॒सन्मे॑ अम्ब॒ सक्थि॑ मे॒ शिरो॑ मे॒ वीव हृष्यति॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (७)
हे माता! मेरा शीश, कमर और टांगें पक्षी के समान फड़क रहे हैं. जैसा होना है, वैसा ही हो. इंद्र सब से उत्कृष्ट है. (७)
O Mother! My head, waist and legs are twitching like a bird. Be as it is to be. Indra is the best of all. (7)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 126
किं सु॑बाहो स्वङ्गुरे॒ पृथु॑ष्टो॒ पृथु॑जाघने । किं शू॑रपत्नि न॒स्त्वम॒भ्यमीषि वृ॒षाक॑पिं॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (८)
हे शूर की पत्नी! तू सुंदर भुजाओं, सुंदर उंगलियों, पृथु नितंबों तथा मोटी जांघों वाली है. वृषाकपि के सामने तू हमारी हिसा क्यों करती है? इंद्र सब से उत्कृष्ट हैं. (८)
O wife of the knight! You have beautiful arms, beautiful fingers, vertebral buttocks and thick thighs. Why do you take our part in front of Taurus? Indra is the best of all. (8)
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