हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.126.8

कांड 20 → सूक्त 126 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 126
किं सु॑बाहो स्वङ्गुरे॒ पृथु॑ष्टो॒ पृथु॑जाघने । किं शू॑रपत्नि न॒स्त्वम॒भ्यमीषि वृ॒षाक॑पिं॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (८)
हे शूर की पत्नी! तू सुंदर भुजाओं, सुंदर उंगलियों, पृथु नितंबों तथा मोटी जांघों वाली है. वृषाकपि के सामने तू हमारी हिसा क्यों करती है? इंद्र सब से उत्कृष्ट हैं. (८)
O wife of the knight! You have beautiful arms, beautiful fingers, vertebral buttocks and thick thighs. Why do you take our part in front of Taurus? Indra is the best of all. (8)