हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.127.11

कांड 20 → सूक्त 127 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 127
इन्द्रः॑ का॒रुम॑बूबुध॒दुत्ति॑ष्ठ॒ वि च॑रा॒ जन॑म् । ममेदु॒ग्रस्य॒ चर्कृ॑धि॒ सर्व॒ इत्ते॑ पृणाद॒रिः ॥ (११)
स्तुति करने वालों से इंद्र ने कहा-उठ कर खड़ा हो जा और मनुष्यों में घूम. तू मेरी कृपा से कर्म करने वाला बने. तेरा शत्रु तेरे पास अपना सर्वस्व छोड़ दे. (११)
Indra said to those who praised - Stand up and roam among human beings. You become the one who works by my grace. May your enemy leave his all to you. (11)