हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.127.7

कांड 20 → सूक्त 127 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 127
राज्ञो॑ विश्व॒जनी॑नस्य॒ यो दे॒वोऽमर्त्याँ॒ अति॑ । वै॑श्वान॒रस्य॒ सुष्टु॑ति॒मा सु॒नोता॑ परि॒क्षितः॑ ॥ (७)
यदि देवता प्रजा के मनुष्यों का अतिक्रमण करे तो वैश्वानर की मंगलमयी स्तुति करनी चाहिए. (७)
If the deity encroaches on the human beings of the people, then one should praise Vaishvanar. (7)