हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.127.8

कांड 20 → सूक्त 127 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 127
प॑रि॒च्छिन्नः॒ क्षेम॑मकरो॒त्तम॒ आस॑नमा॒चर॑न् । कुला॑यन्कृ॒ण्वन्कौर॑व्यः॒ पति॒र्वद॑ति जा॒यया॑ ॥ (८)
मंगल करने वाला देवता आसन का विस्तार करता है. कौरव्य पति इस प्रकार की शिक्षा देता हुआ अपनी पत्नी से कहता है. (८)
The god who does Mars expands the seat. The Kauravya husband tells his wife while giving this kind of education. (8)