अथर्ववेद (कांड 20) अथर्ववेद: 20.129.10 | सूक्त: 129 शृङ्गं॑ ध॒मन्त॑ आसते ॥ (१०) वे सींगों को नष्ट कर के बैठे हैं. (१०) They are sitting destroying the horns. (10)