हरि ॐ
अथर्ववेद (Atharvaved)
अथर्ववेद (कांड 20)
ए॒ता अश्वा॒ आ प्ल॑वन्ते ॥ (१)
यह घोड़ी अच्छी तरह उछलती है. (१)
This mare bounces well. (1)
अथर्ववेद (कांड 20)
प्र॑ती॒पं प्राति॑ सु॒त्वन॑म् ॥ (२)
खुवा प्रतीप को संपन्न करता है. (२)
Khuva endows the pratip. (2)
अथर्ववेद (कांड 20)
तासा॒मेका॒ हरि॑क्निका ॥ (३)
उन में एक हरिक्निका है. (३)
One of them is Hariknica. (3)
अथर्ववेद (कांड 20)
हरि॑क्नि॒के किमि॑च्छसि ॥ (४)
हे हरिक्निका! तेरी क्या इच्छा है? (४)
O Haricnica! What do you wish? (4)
अथर्ववेद (कांड 20)
सा॒धुं पु॒त्रं हि॑र॒ण्यय॑म् ॥ (५)
हे पुत्र! साधु को स्वर्ण दो. (५)
O son! Give gold to the monk. (5)
अथर्ववेद (कांड 20)
क्वाह॑तं॒ परा॑स्यः ॥ (६)
अवाहत अर्थात् घायल हुआ परास्य कहां है? (६)
Where is the injured parasya? (6)
अथर्ववेद (कांड 20)
यत्रा॒मूस्तिस्रः॑ शिंश॒पाः ॥ (७)
इस स्थान पर तीन शिंशिपा वृक्ष हैं. (७)
There are three Shinshipa trees at this place. (7)
अथर्ववेद (कांड 20)
परि॑ त्रयः ॥ (८)
सभी ओर तीन हैं. (८)
There are three on all sides. (8)