हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.13.1

कांड 20 → सूक्त 13 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 13
इन्द्र॑श्च॒ सोमं॑ पिबतं बृहस्पते॒ऽस्मिन्य॒ज्ञे म॑न्दसा॒ना वृ॑षण्वसू । आ वां॑ विश॒न्त्विन्द॑वः स्वा॒भुवो॒ऽस्मे र॒यिं सर्व॑वीरं॒ नि य॑च्छतम् ॥ (१)
हे बृहस्पति देव! तुम और इंद्र इस यज्ञ में प्रसन्न होने वाले तथा धनों की वर्षा करने वाले हो. तुम दोनों सोमरस का पान करो. उत्तम सोमरस ने तुम दोनों के शरीर में प्रवेश किया है. तुम हमें सभी पुत्रों से युक्त धन प्रदान करो. (१)
O Jupiter God! You and Indra are going to be happy in this yajna and rain wealth. You both drink someras. The best Somers has entered the bodies of both of you. Give us wealth with all sons. (1)