अथर्ववेद (कांड 20) अथर्ववेद: 20.130.14 | सूक्त: 130 मा त्वा॑भि॒ सखा॑ नो विदन् ॥ (१४) मेरा मित्र मुझे और तुझे मिले. (१४) My friend met me and you. (14)