अथर्ववेद (कांड 20) अथर्ववेद: 20.131.18 | सूक्त: 131 अदू॑हमि॒त्यां पूष॑कम् ॥ (१८) मैं पूषा का दोहन करता हूं. (१८) I exploit Pusha. (18)