अथर्ववेद (कांड 20) अथर्ववेद: 20.131.19 | सूक्त: 131 अत्य॑र्ध॒र्च प॑र॒स्वतः॑ ॥ (१९) अर्धर्च अर्थात् आधी ऋचा प्रवृत्त हो. (१९) Half that is, the first one is in force. (19)