अथर्ववेद (कांड 20) अथर्ववेद: 20.131.4 | सूक्त: 131 श॒तं वा॒ भार॑ती॒ शवः॑ ॥ (४) वाणी के सौ बल हैं. (४) There are a hundred forces of speech. (4)