हरि ॐ
अथर्ववेद (Atharvaved)
अथर्ववेद (कांड 20)
इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धरा॒गरा॑ला॒गुद॑भर्त्सथ ॥ (१)
यहां चारों दिशाओं से घिरे हुए को भयभीत करो. (१)
Scare the surrounded by all four directions here. (1)
अथर्ववेद (कांड 20)
इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धरा॑ग्व॒त्साः पुरु॑षन्त आसते ॥ (२)
यहां चारों दिशाओं से घिरे स्थान में बालक युवक बनने की इच्छा से बैठे हैं. (२)
Here, in the place surrounded by all four directions, the children are sitting with the desire to become young men. (2)
अथर्ववेद (कांड 20)
इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धरा॒क्स्थाली॑पाको॒ वि ली॑यते ॥ (३)
यहां चारों दिशाओं से घिरे हुए स्थान में स्थालीपाक अर्थात् बटलोई में पकाया हुआ पदार्थ समाप्त हो जाता है. (३)
Here, in the place surrounded by all four directions, the cooked substance ends in Sthalipak i.e. Batloi. (3)
अथर्ववेद (कांड 20)
इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धरा॒क्स वै॑ पृ॒थु ली॑यते ॥ (४)
यहां चारों दिशाओं से घिरे स्थान में वह समाप्त हो जाता है. (४)
Here it ends in a space surrounded by four directions. (4)
अथर्ववेद (कांड 20)
इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धरा॒गास्ते॑ लाहणि॒ लीशा॑थी ॥ (५)
यहां चारों दिशाओं से घिरे स्थान में युवती जीवन धारण करती है. (५)
Here the young woman lives in a place surrounded by four directions. (5)
अथर्ववेद (कांड 20)
इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धरा॒गक्ष्लिली॒ पुच्छिली॑यते ॥ (६)
चारों दिशाओं से घिरे इस स्थान में व्यावहारिक बुद्धि पूछी जाती है. (६)
Practical intelligence is asked in this place surrounded by four directions. (6)