अथर्ववेद (कांड 20)
इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धरा॒गास्ते॑ लाहणि॒ लीशा॑थी ॥ (५)
यहां चारों दिशाओं से घिरे स्थान में युवती जीवन धारण करती है. (५)
Here the young woman lives in a place surrounded by four directions. (5)
कांड 20 → सूक्त 134 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation