हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.135.10

कांड 20 → सूक्त 135 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 135
देवा॑ दद॒त्वासु॑रं॒ तद्वो॑ अस्तु॒ सुचे॑तनम् । युष्माँ॑ अस्तु॒ दिवे॑दिवे प्र॒त्येव॑ गृभायत ॥ (१०)
देवता तुझे प्राण, शक्ति एवं चेतना प्रदान करते हुए प्रत्येक अवसर पर प्राप्त होते हैं. (१०)
The gods give you life, strength and consciousness and attain you on every occasion. (10)