हरि ॐ
अथर्ववेद (Atharvaved)
Home » Atharvaved » Kand 20 » Sukta 135 अथर्ववेद (कांड 20) भुगि॑त्य॒भिग॑तः॒ शलि॑त्य॒पक्रा॑न्तः॒ फलि॑त्य॒भिष्ठि॑तः । दु॒न्दुभि॑माहनना॒भ्यां जरितरोथा॑मो दै॒व ॥ (१)
खाने वाला चला गया, गतिशील जीव भाग गया है तथा उसका शरीर रखा है. हे स्तुति करने वालो! तुम इस के बाद दुंदुभि जिन दो डंडों से बजाई जाती है, उस से खेलो. (१)
The eater is gone, the moving creature has fled and his body is kept. O praisers! After this, play with the two sticks with which Dundubi is played. (1)
अथर्ववेद (कांड 20) को॑श॒बिले॑ रजनि॒ ग्रन्थे॑र्धा॒नमु॒पानहि॑ पा॒दम् । उत्त॑मां॒ जनि॑मां ज॒न्यानुत्त॑मां॒ जनी॒न्वर्त्म॑न्यात् ॥ (२)
पैर के जूते में, धान की कुटिया में तथा उत्तम धरती से उत्पन्न पदार्थो को मार्ग में रखो. (२)
Put the materials produced in the shoes of the feet, in the paddy hut and from the best earth. (2)
अथर्ववेद (कांड 20) अला॑बूनि पृ॒षात॑का॒न्यश्व॑त्थ॒पला॑शम् । पिपी॑लिका॒वट॒श्वसो॑ वि॒द्युत्स्वाप॑र्णश॒फो गोश॒फो जरित॒रोथामो॑ दै॒व ॥ (३)
हे स्तोता! पृषातक अर्थात् तुंबी, लौकी, पीपल, ढाक, बरगद, सुंदर पत्तों वाले, कटहल, विद्युत और गाय के खुर के बाद शक्ति से क्रीड़ा कर. (३)
This hymn! Play with power after the prishatak i.e. tumbi, gourd, peepal, dhak, banyan, beautiful leaves, jackfruit, electricity and cow's hoof. (3)
अथर्ववेद (कांड 20) वीमे दे॒वा अ॑क्रंस॒ताध्व॒र्यो क्षि॒प्रं प्र॒चर॑ । सु॑स॒त्यमिद्गवा॑म॒स्यसि॑ प्रखु॒दसि॑ ॥ (४)
हे अध्वर्यु जनो! उन प्रकाश वाले अथवा तेजस्वी देवों के सामने शीघ्र ही मंत्रों का उच्चारण करो. गायों के लिए तुम सत्य रूप हो. (४)
O god! Chant mantras soon in front of those light or bright gods. For cows you are the true form. (4)
अथर्ववेद (कांड 20) प॒त्नी यदृ॑श्यते प॒त्नी यक्ष्य॑माणा जरित॒रोथामो॑ दै॒व । हो॒ता वि॑ष्टीमे॒न ज॑रित॒रोथामो॑ दै॒व ॥ (५)
पत्नी यज्ञ करती हुई दिखाई दे रही है. इस के बाद तुम भयों पर विजय प्राप्त करने की इच्छा करना. (५)
The wife is seen performing yagna. After this you wish to conquer fears. (5)
अथर्ववेद (कांड 20) आदि॑त्या ह जरित॒रङ्गि॑रोभ्यो॒ दक्षि॑णाम॒नय॑न् । तां ह॑ जरितः॒ प्रत्या॑यं॒स्तामु ह॑ जरितः॒ प्रत्या॑यन् ॥ (६)
हे स्तोता! उस को उन्होंने ग्रहण किया. उसे तुम ने भी ग्रहण किया. हम चेतन प्राणियों को हानि पहुंचाने वालों को तथा यज्ञ न करने वालों को विशेष चेतन प्राणियों को प्रदान करते हैं. (६)
This hymn! He accepted that. You also accepted it. We provide special conscious beings to those who harm conscious beings and to those who do not perform yajna. (6)
अथर्ववेद (कांड 20) तां ह॑ जरितर्नः॒ प्रत्य॑गृभ्णं॒स्तामु ह॑ जरितर्नः॒ प्रत्य॑गृभ्णः । अहा॑नेतरसं न॒ वि चे॒तना॑नि य॒ज्ञानेत॑रसं न॒ पुरो॒गवा॑मः ॥ (७)
तुम श्वैत तथा आशुपत्य वाली ऋचाओं से युवा अवस्था प्राप्त करते हो. यह शीघ्र पूर्ण करता है. (७)
You attain a young state from the verses of whiteness and non-violence. It completes quickly. (7)
अथर्ववेद (कांड 20) उ॒त श्वेत॒ आशु॑पत्वा उ॒तो पद्या॑भि॒र्यवि॑ष्ठः । उ॒तेमाशु॒ मानं॑ पिपर्ति ॥ (८)
हे स्तोता! तुम अंगिरागोत्रीय ऋषियों से दक्षिणा लाते थे. उसे वे लाए थे, वे उसे लाए थे. (८)
This hymn! You used to bring dakshina from the Angiragotriya sages. They brought him, they brought him. (8)