हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.135.4

कांड 20 → सूक्त 135 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 135
वीमे दे॒वा अ॑क्रंस॒ताध्व॒र्यो क्षि॒प्रं प्र॒चर॑ । सु॑स॒त्यमिद्गवा॑म॒स्यसि॑ प्रखु॒दसि॑ ॥ (४)
हे अध्वर्यु जनो! उन प्रकाश वाले अथवा तेजस्वी देवों के सामने शीघ्र ही मंत्रों का उच्चारण करो. गायों के लिए तुम सत्य रूप हो. (४)
O god! Chant mantras soon in front of those light or bright gods. For cows you are the true form. (4)