हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.136.5

कांड 20 → सूक्त 136 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 136
म॑हान॒ग्न्यतृप्नद्वि॒ मोक्र॑द॒दस्था॑नासरन् । शक्ति॑का॒नना॑ स्वच॒मश॑कं सक्तु॒ पद्य॑म् ॥ (५)
महान अग्नि ऊपर खड़े हुए जनों पर आक्रमण न करते हुए तृप्ति प्राप्त करते हैं. हम तेजस्वी जनों को शक्ति प्राप्त हो. (५)
Great agnis do not attack the people standing above and attain satisfaction. May we the brightest get strength. (5)