हरि ॐ
अथर्ववेद (Atharvaved)
अथर्ववेद (कांड 20)
यद॑स्या अंहु॒भेद्याः॑ कृ॒धु स्थू॒लमु॒पात॑सत् । मु॒ष्काविद॑स्या एज॒तो गो॑श॒फे श॑कु॒लावि॑व ॥ (१)
पाप का विनाश करने वाली ओषधि को क्रोध हो गया है. इस के सूखे हुए शकुल गाय के खुर के गड्ढे में भरे पानी में कांपते हैं. (१)
The medicine that destroys sin has become angry. Its dried shakul trembles in the water filled in the pit of the cow's hoof. (1)
अथर्ववेद (कांड 20)
यदा॑ स्थू॒लेन॒ पस॑साणौ मु॒ष्का उपा॑वधीत् । विष्व॑ञ्चा व॒स्या वर्ध॑तः॒ सिक॑तास्वेव॒ गर्द॑भौ ॥ (२)
जब स्थूल पसस् के द्वारा मनुष्यों में अणु का प्रहार किया गया, तब धूल में लोटने वाले गधों के समान आच्छादनी अर्थात् छप्पर में मुश्क बढ़ते हैं. (२)
When the molecule is struck in humans by the gross rib, the clouds like donkeys rolling in the dust increase in the roof. (2)
अथर्ववेद (कांड 20)
यद॑ल्पिका॒स्वल्पिका॒ कर्क॑न्धू॒केव॒ पद्य॑ते । वा॑सन्ति॒कमि॑व॒ तेज॑नं॒ यन्त्य॒वाता॑य॒ वित्प॑ति ॥ (३)
जो कर्कधू अर्थात् बेरी के समान घर को नष्ट करने वाले तथा अल्प से भी अल्प कण प्राप्त होते हैं, तब वासंतिक तेज आधान के निमित्त उस में गमन करते हैं. (३)
Those who destroy the house like a berry and get even the smallest particles, then they go to it for the sake of vasantik sharp transfusion. (3)
अथर्ववेद (कांड 20)
यद्दे॒वासो॑ ललामगुं॒ प्रवि॑ष्टी॒मिन॑माविषुः । स॑कु॒ला दे॑दिश्यते॒ नारी॑ स॒त्यस्या॑क्षि॒भुवो॒ यथा॑ ॥ (४)
जब सुंदर गौ में प्रविष्ट देवता हर्षित होते हैं, तब नारी आंखों देखी के समान सत्य से युक्त हो जाती है. (४)
When the gods entering the beautiful cow are happy, then the woman becomes full of truth like seeing the eyes. (4)
अथर्ववेद (कांड 20)
म॑हान॒ग्न्यतृप्नद्वि॒ मोक्र॑द॒दस्था॑नासरन् । शक्ति॑का॒नना॑ स्वच॒मश॑कं सक्तु॒ पद्य॑म् ॥ (५)
महान अग्नि ऊपर खड़े हुए जनों पर आक्रमण न करते हुए तृप्ति प्राप्त करते हैं. हम तेजस्वी जनों को शक्ति प्राप्त हो. (५)
Great agnis do not attack the people standing above and attain satisfaction. May we the brightest get strength. (5)
अथर्ववेद (कांड 20)
म॑हान॒ग्न्युलूखलमति॒क्राम॑न्त्यब्रवीत् । यथा॒ तव॑ वनस्पते॒ निर॑घ्नन्ति॒ तथै॑वेति ॥ (६)
महान अग्नि उलूखल को लांघते हुए कहने लगे-हे बृहस्पति! लोग जिस प्रकार तुझे कूटते हैं, वैसा होना चाहिए. (६)
Crossing the great agni, he said, "O Jupiter! It should be the way people beat you. (6)
अथर्ववेद (कांड 20)
म॑हान॒ग्न्युप॑ ब्रूते भ्र॒ष्टोऽथाप्य॑भूभुवः । यथै॒व ते॑ वनस्पते॒ पिप्प॑ति॒ तथै॑वेति ॥ (७)
महान अग्नि ने कहा-तू मिट कर भी बारबार उत्पन्न होती है. हे वनस्पति! जिस भांति पूर्ण होती है, वैसा ही होना चाहिए. (७)
The great agni said- You are born again and again even after being erased. O vegetation! It should be the way it is completed. (7)
अथर्ववेद (कांड 20)
म॑हान॒ग्न्युप॑ ब्रूते भ्र॒ष्टोऽथाप्य॑भूभुवः । यथा॑ वयो॒ विदाह्य॑ स्व॒र्गे न॒मवद॑ह्यते ॥ (८)
महान अग्नि ने कहा-तू नष्ट हो कर भी उत्पन्न हो जाती है. जीर्ण अवस्था में होने पर भी स्वर्ग में तेरा दोहन हवि के समान किया जाता है. (८)
The great agni said- You are born even after being destroyed. Even if you are in a dilapidated state, you are exploited like havi in heaven. (8)