हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.136.7

कांड 20 → सूक्त 136 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 136
म॑हान॒ग्न्युप॑ ब्रूते भ्र॒ष्टोऽथाप्य॑भूभुवः । यथै॒व ते॑ वनस्पते॒ पिप्प॑ति॒ तथै॑वेति ॥ (७)
महान अग्नि ने कहा-तू मिट कर भी बारबार उत्पन्न होती है. हे वनस्पति! जिस भांति पूर्ण होती है, वैसा ही होना चाहिए. (७)
The great agni said- You are born again and again even after being erased. O vegetation! It should be the way it is completed. (7)