हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.137.10

कांड 20 → सूक्त 137 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 137
त्वं ह॒ त्यत्स॒प्तभ्यो॒ जाय॑मानोऽश॒त्रुभ्यो॑ अभवः॒ शत्रु॑रिन्द्र । गू॒ढे द्यावा॑पृथि॒वी अन्व॑विन्दो विभु॒मद्भ्यो॒ भुव॑नेभ्यो॒ रणं॑ धाः ॥ (१०)
हे इंद्र! तुम ने आकाश और पृथ्वी का स्पर्श किया तथा उन्हें प्राप्त कर लिया. सात मित्रों से उत्पन्न हुए तुम बाद में उन के शत्रु बन जाते हो. तुम ने विस्तृत भुवनों से युद्ध किया. (१०)
O Indra! You touched the heavens and the earth and gained them. Born of seven friends, you later become their enemies. You fought with the widestudies. (10)