हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.137.3

कांड 20 → सूक्त 137 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 137
द॑धि॒क्राव्णो॑ अकारिषं जि॒ष्णोरश्व॑स्य वा॒जिनः॑ । सु॑र॒भि नो॒ मुखा॑ कर॒त्प्र ण॒ आयूं॑षि तारिषत् ॥ (३)
इंद्र की सवारी के लिए मैं वेगवान अर्थात्‌ तेज दौड़ने वाले घोड़े का पूजन कर चुका हूं. वे इंद्र हमें सुरभि अर्थात्‌ गाय का स्वामी बनाएं तथा हमें श्रेष्ठ बनाते हुए हमारा जीवन उत्तम बनाएं. (३)
For the ride of Indra, I have worshiped the fast running horse. That Indra should make us surabhi i.e. the swami of the cow and make us better and make our life better. (3)