हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.137.5

कांड 20 → सूक्त 137 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 137
इन्दु॒रिन्द्रा॑य पवत॒ इति॑ दे॒वासो॑ अब्रुवन् । वा॒चस्पति॑र्मखस्यते॒ विश्व॒स्येशा॑न॒ ओज॑सा ॥ (५)
इंद्र के लिए सोमरस का शोधन किया जा चुका है. संसार के स्वामी वाचस्पति अपने ओज से प्रशंसित होते हैं. (५)
Someras has been refined for Indra. Vachaspati, the swami of the world, is admired with his oz. (5)