अथर्ववेद (कांड 20)
द्र॒प्सम॑पश्यं॒ विषु॑णे॒ चर॑न्तमुपह्व॒रे न॒द्यो अंशु॒मत्याः॑ । नभो॒ न कृ॒ष्णम॑वतस्थि॒वांस॒मिष्या॑मि वो वृषणो॒ युध्य॑ता॒जौ ॥ (८)
विषम और विचरण करने वाले शुकु अर्थात् काले असुर को अंशुमती के पास घूमते हुए देखा है. वे भी सूर्य के समान ही आकाश में निवास करते हैं. मैं उन का आश्रित हूं. कामनाओं की वर्षा करने वाले इंद्र युद्ध में तुम्हारा साथ दें. (८)
I have seen the odd and moving Shuku i.e. black asura roaming near Anshumati. They also live in the sky just like the sun. I am their dependent. May Indra, who showers desires, support you in the war. (8)