हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.139.2

कांड 20 → सूक्त 139 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 139
यद॒न्तरि॑क्षे॒ यद्दि॒वि यत्पञ्च॒ मानु॑षाँ॒ अनु॑ । नृ॒म्णं तद्ध॑त्तमश्विना ॥ (२)
हे अश्विनीकुमारो अंतरिक्ष तथा स्वर्ग में जो धन है तथा निषाद नाम की पांचवीं जाति दासों के पास जो धन है, उसे हमें दे दो. (२)
O Ashwini Kumaro, give us the wealth that is in space and heaven and the wealth that the fifth jati slaves named Nishad have. (2)