हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.140.2

कांड 20 → सूक्त 140 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 140
आ नू॒नम॒श्विनो॒रृषि॒ स्तोमं॑ चिकेत वा॒मया॑ । आ सोमं॒ मधु॑मत्तमं घ॒र्मं सि॑ञ्चा॒दथ॑र्वणि ॥ (२)
उपासना के योग्य अपनी बुद्धियों के द्वारा ऋषियों ने अश्विनी कुमारों के स्तोत्र को जान लिया. इस लिए तुम मधुरता वाले सोमरस को अथर्व से सिंचित करो. (२)
Through their intellects worthy of worship, the sages knew the stotra of Ashwini Kumars. Therefore, you should irrigate the sweet Somaras with Atharva. (2)