हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.140.4

कांड 20 → सूक्त 140 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 140
यद॒द्य वां॑ नासत्यो॒क्थैरा॑चुच्युवी॒महि॑ । यद्वा॒ वाणी॑भिरश्विने॒वेत्का॒ण्वस्य॑ बोधतम् ॥ (४)
हे अश्विनीकुमारो! हम उकथों अर्थात्‌ मंत्र समूहों के द्वारा तुम्हारा आश्रय लेते हैं. यह कण्व ऋषि की कृपा है कि हम वाणी के द्वारा तुम्हारी सेवा कर रहे हैं. (४)
O Ashwinikumaro! We take refuge in you through ukthas i.e. mantra groups. It is the grace of Kanva Rishi that we are serving you through speech. (4)