हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.141.2

कांड 20 → सूक्त 141 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 141
यदिन्द्रे॑ण स॒रथं॑ या॒थो अ॑श्विना॒ यद्वा॑ वा॒युना॒ भव॑थः॒ समो॑कसा । यदा॑दि॒त्येभि॑रृ॒भुभिः॑ स॒जोष॑सा॒ यद्वा॒ विष्णो॑र्वि॒क्रम॑णेषु॒ तिष्ठ॑थः ॥ (२)
हे अश्विनीकुमारो! तुम इंद्र के रथ में उन के साथ बैठ कर चलते हो. तुम वायु के साथ चलने वाले, आदित्य और ऋभुओं, स्नेही तथा विष्णु के विक्रमणों अर्थात्‌ डगों से भी युक्त हो. (२)
O Ashwinikumaro! You sit with him in Indra's chariot and walk. You are also full of the vikramas of Aditya and The Rainbows, the loving and the wicked ones of Vishnu. (2)