हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.142.4

कांड 20 → सूक्त 142 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 142
यदापी॑तासो अं॒शवो॒ गावो॒ न दु॒ह्र ऊध॑भिः । यद्वा॒ वाणी॒रनु॑षत॒ प्र दे॑व॒यन्तो॑ अ॒श्विना॑ ॥ (४)
जब रश्मियां जल पीने वाली गायों के समान होती हैं, तब गायों के ऐनों से दूध काढ़ा जाता है. हे अश्चिनीकुमारो! उस समय ऋषियों की वाणी तुम्हारी स्तुति करती है. (४)
When the rays are similar to the cows drinking water, then milk is brewed from the annes of the cows. O Ashchini Kumaro! At that time, the voice of the sages praises you. (4)