हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.142.3

कांड 20 → सूक्त 142 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 142
यदु॑षो॒ यासि॑ भा॒नुना॒ सं सूर्ये॑ण रोचसे । आ हा॒यम॒श्विनो॒ रथो॑ व॒र्तिर्या॑ति नृ॒पाय्य॑म् ॥ (३)
हे अश्विनीकुमारों के रथ! तू अपने तेज से उषा के साथ मिलता हुआ सूर्य के साथ दमकता है. वह रथ अश्नों के द्वारा मार्ग पर जाता है. (३)
O chariot of Ashwini Kumars! You meet with Usha with your glory and shine with the sun. That chariot goes on the path through the horse. (3)