अथर्ववेद (कांड 20)
यन्नू॒नं धी॒भिर॑श्विना पि॒तुर्योना॑ नि॒षीद॑थः । यद्वा॑ सु॒म्नेभि॑रुक्थ्या ॥ (६)
हे अश्चिनीकुमारो! तुम अपनी बुद्धि के द्वारा अपने पालनकर्ता के समीप विराजमान होते हो. तुम कल्याणकारी प्रशंसा के पात्र हो. (६)
O Ashchini Kumaro! You sit near your Swami through your wisdom. You deserve welfare praise. (6)