हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
व॒यमु॑ त्वा त॒दिद॑र्था॒ इन्द्र॑ त्वा॒यन्तः॒ सखा॑यः । कण्वा॑ उ॒क्थेभि॑र्जरन्ते ॥ (१)
हे इंद्र! हम कण्व गोत्र वाले महर्षि सखा के समान तुम्हारी कामना करते हुए तुम से संबंधित स्तोत्र से तुम्हारी स्तुति करते हैं. (१)
O Indra! We praise you with a hymn related to you, wishing for you like Maharishi Sakha of Kanva gotra. (1)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
न घे॑म॒न्यदा प॑पन॒ वज्रि॑न्न॒पसो॒ नवि॑ष्टौ । तवेदु॒ स्तोमं॑ चिकेत ॥ (२)
हे वज्रधारी इंद्र! यज्ञरूपी नवीन कर्म की इच्छा पर हम इस समय तुम्हारे अतिरिक्त किसी अन्य देव की स्तुति नहीं करते हैं. हम केवल तुम्हारी स्तुति को जानते हैं. (२)
O Vajradhari Indra! At this time, we do not praise any god other than you on the desire of new karma in the form of yajna. We only know your praise. (2)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
इ॒च्छन्ति॑ दे॒वाः सु॒न्वन्तं॒ न स्वप्ना॑य स्पृहयन्ति । यन्ति॑ प्र॒माद॒मत॑न्द्राः ॥ (३)
इंद्र आदि देव सोमरस निचोड़ने वाले यजमान की कामना करते हैं. वे उदासीनता नहीं करते हैं. वे अत्यंत मदकारी सोम रस के लिए आलस्य रहित हो कर जाते हैं. (३)
Indra adi dev somaras wishes for the squeezing host. They don't indifference. They become lazy for extremely alcoholic som rasa. (3)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
व॒यमि॑न्द्र त्वा॒यवो॒ऽभि प्र णो॑नुमो वृषन् । वि॒द्धि त्वस्य नो॑ वसो ॥ (४)
हे कामनाओं को पूर्ण करने वाले इंद्र! तुम्हारी इच्छा करते हुए हम तुम्हारे सामने तुम्हारी स्तुति करते हैं. तुम भी हमारे स्तोत्र की कामना करो. (४)
O Indra, who fulfills desires! We praise you in front of you while wishing you. Wish you also our psalms. (4)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
मा नो॑ नि॒दे च॒ वक्त॑वे॒ऽर्यो र॑न्धी॒ररा॑व्णे । त्वे अपि॒ क्रतु॒र्मम॑ ॥ (५)
हे स्वामी इंद्र! तुम हमें निंदक के वश में मत करो. हमें कठोर वचन बोलने वालों तथा दान न करने वाले शत्रुओं के अधीन मत करो. (५)
O Swami Indra! Don't you subdue us cynically. Do not subject us to enemies who speak harsh words and do not donate. (5)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
त्वं वर्मा॑सि स॒प्रथः॑ पुरोयो॒धश्च॑ वृत्रहन् । त्वया॒ प्रति॑ ब्रुवे यु॒जा ॥ (६)
हे वृत्र का हनन करने वाले और सब से महान इंद्र! तुम आगे रह कर युद्ध करते हो. तुम मेरे कवच हो. मैं तुम्हारी सहायता से शत्रुओं को भयभीत करता हूं. (६)
O Indra, the destroyer of Vritra and the greatest! You stay ahead and fight. You are my armor. I frighten the enemies with your help. (6)