हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.18.5

कांड 20 → सूक्त 18 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
मा नो॑ नि॒दे च॒ वक्त॑वे॒ऽर्यो र॑न्धी॒ररा॑व्णे । त्वे अपि॒ क्रतु॒र्मम॑ ॥ (५)
हे स्वामी इंद्र! तुम हमें निंदक के वश में मत करो. हमें कठोर वचन बोलने वालों तथा दान न करने वाले शत्रुओं के अधीन मत करो. (५)
O Swami Indra! Don't you subdue us cynically. Do not subject us to enemies who speak harsh words and do not donate. (5)