हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.23.6

कांड 20 → सूक्त 23 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 23
स म॑न्दस्वा॒ ह्यन्ध॑सो॒ राध॑से त॒न्वा म॒हे । न स्तो॒तारं॑ नि॒दे क॑रः ॥ (६)
हे इंद्र! तुम अपने शरीर में बल प्राप्त करने के लिए सोमरस पी कर प्रसन्न बनो. मुझे अधिक धन देने के लिए तुम हर्षित होओ. मैं तुम्हारा स्तोता हूं. मुझे दूसरे का निंदक मत बनाओ. (६)
O Indra! You become happy by drinking somras to gain strength in your body. You are happy to give me more money. I am your host. Don't make me a slanderer of others. (6)