हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.28.1

कांड 20 → सूक्त 28 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 28
व्यन्तरि॑क्षमतिर॒न्मदे॒ सोम॑स्य रोच॒ना । इन्द्रो॒ यदभि॑नद्व॒लम् ॥ (१)
सोमपान से उत्पन्न शक्ति के द्वारा जब इंद्र ने मेघ को विदीर्ण किया, तब वर्षा के जल से अंतरिक्ष की वृद्धि की. (१)
When Indra pierced the cloud through the power generated by sompan, he increased space with rainwater.