हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.29.4

कांड 20 → सूक्त 29 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 29
मा॒याभि॑रु॒त्सिसृ॑प्सत इन्द्र॒ द्यामा॒रुरु॑क्षतः । अव॒ दस्यूँ॑रधूनुथाः ॥ (४)
हे इंद्र! जो असुर अपनी माया से आकाश पर चढ़ने की इच्छा करते हैं, उन्हें तुम अधोमुख कर के गिरा देते हो. (४)
O Indra! Those asuras who wish to climb the sky with their maya, you turn them down and drop them down. (4)