हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.31.2

कांड 20 → सूक्त 31 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 31
अरं॒ कामा॑य॒ हर॑यो दधन्विरे स्थि॒राय॑ हिन्व॒न्हर॑यो॒ हरी॑ तु॒रा । अर्व॑द्भि॒र्यो हरि॑भि॒र्जोष॒मीय॑ते॒ सो अ॑स्य॒ कामं॒ हरि॑वन्तमानशे ॥ (२)
हरे रंग वाले सोम युद्धों में अटल रहने वाले इंद्र को धारण करते हैं. सोम ही इंद्र के घोड़ों को यज्ञ की ओर जाने के लिए प्रेरित करते हैं. जो इंद्र अपने अश्वो द्वारा वेग से यज्ञ में आते हैं, वे सोमरस वाले यजमान के पास पहुंच जाते हैं. (२)
The green soma wears Indra, who is steadfast in wars. It is Soma who inspires Indra's horses to go towards the yagna. Indra, who comes to the yajna with speed by his horse, reaches the host of Someras. (2)