हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 31
ता व॒ज्रिणं॑ म॒न्दिनं॒ स्तोम्यं॒ मद॒ इन्द्रं॒ रथे॑ वहतो हर्यता॒ हरी॑ । पु॒रूण्य॑स्मै॒ सव॑नानि॒ हर्य॑त॒ इन्द्रा॑य॒ सोमा॒ हर॑यो दधन्विरे ॥ (१)
सोमरस से उत्पन्न शक्ति प्राप्त करने के लिए इंद्र के अश्व उन्हें हमारे यज्ञ में ला रहे हैं. तीनों सवनों में निचोड़े गए सोम इंद्र को धारण करते हैं. (१)
Indra's horses are bringing him to our yajna to get the power generated from Someras. Soma, squeezed in the three savanas, holds Indra. (1)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 31
अरं॒ कामा॑य॒ हर॑यो दधन्विरे स्थि॒राय॑ हिन्व॒न्हर॑यो॒ हरी॑ तु॒रा । अर्व॑द्भि॒र्यो हरि॑भि॒र्जोष॒मीय॑ते॒ सो अ॑स्य॒ कामं॒ हरि॑वन्तमानशे ॥ (२)
हरे रंग वाले सोम युद्धों में अटल रहने वाले इंद्र को धारण करते हैं. सोम ही इंद्र के घोड़ों को यज्ञ की ओर जाने के लिए प्रेरित करते हैं. जो इंद्र अपने अश्वो द्वारा वेग से यज्ञ में आते हैं, वे सोमरस वाले यजमान के पास पहुंच जाते हैं. (२)
The green soma wears Indra, who is steadfast in wars. It is Soma who inspires Indra's horses to go towards the yagna. Indra, who comes to the yajna with speed by his horse, reaches the host of Someras. (2)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 31
हरि॑श्मशारु॒र्हरि॑केश आय॒सस्तु॑र॒स्पेये॒ यो ह॑रि॒पा अव॑र्धत । अर्व॑द्भि॒र्यो हरि॑भिर्वा॒जिनी॑वसु॒रति॒ विश्वा॑ दुरि॒ता पारि॑ष॒द्धरी॑ ॥ (३)
इंद्र के केश, दाढ़ी और मूंछे सभी हरे रंग के हैं. इंद्र संस्कारित होने पर सोमरस को पीते हुए वृद्धि प्राप्त करते हैं. इंद्र सोमरस को पीने के लिए अपने तेज चलने वाले घोड़ों से सोमपान करने आते हैं. हवि उन का धन है. इंद्र अपने रथ में घोड़ों को जोड़ कर हमारे सभी पाप नष्ट करें. (३)
Indra's hair, beard and moustache are all green. Indra attains growth by drinking Someras when he is cultured. Indra comes to drink Somras with his fast-moving horses to drink. Havi is their wealth. May Indra destroy all our sins by adding horses to his chariot. (3)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 31
स्रुवे॑व यस्य॒ हरि॑णी विपे॒ततुः॒ शिप्रे॒ वाजा॑य॒ हरि॑णी॒ दवि॑ध्वतः । प्र यत्कृ॒ते च॑म॒से मर्मृ॑ज॒द्धरी॑ पी॒त्वा मद॑स्य हर्य॒तस्यान्ध॑सः ॥ (४)
यज्ञ में जिस प्रकार वे चलते हैं, उसी प्रकार सोमरस का पान करने के लिए इंद्र की हरे रंग की चिबुक अर्थात्‌ ठुङूडी चलती है. जब चमस सोमरस से भर जाता है, तब उसे पीने के लिए इंद्र की ठुडूडी फड़कने लगती है. उस समय इंद्र अपने घोड़ों का परिमार्जन अर्थात्‌ सफाई करते हैं. (४)
Just as he walks in the yajna, in the same way, Indra's green colored chinbuk i.e. chindi runs to drink someras. When Chamas is filled with somersa, Indra's theududi starts twitching to drink it. At that time Indra cleans his horses. (4)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 31
उ॒त स्म॒ सद्म॑ हर्य॒तस्य॑ प॒स्त्योरत्यो॒ न वाजं॒ हरि॑वाँ अचिक्रदत् । म॒ही चि॒द्धि धि॒षणाह॑र्य॒दोज॑सा बृ॒हद्वयो॑ दधिषे हर्य॒तश्चि॒दा ॥ (५)
इंद्र का निवास द्यावा पृथ्वी में है. जिस प्रकार घोड़ा युद्ध क्षेत्र में अग्रसर होता है, उसी प्रकार इंद्र अपने घोड़ों पर चढ़ कर यज्ञशाला की ओर बढ़ते हैं. हे इंद्र! हमारा स्तोत्र तुम्हारी कामना करता है. तुम भी यजमान की कामना करते हुए उसे असीमित धन देते हो. (५)
Indra's residence is in the earth. Just as the horse moves in the war zone, Indra climbs on his horses and moves towards the Yagyashala. O Indra! Our hymn wishes you. You also wish the host and give him unlimited money. (5)