हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.34.11

कांड 20 → सूक्त 34 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 34
यः श्म्ब॑रं॒ पर्व॑तेषु क्षि॒यन्तं॑ चत्वारिं॒श्यां श॒रद्य॒न्ववि॑न्दत् । ओ॑जा॒यमा॑नं॒ यो अहिं॑ ज॒घान॒ दानुं॒ शया॑नं॒ स ज॑नास॒ इन्द्रः॑ ॥ (११)
जिन्होंने चालीस वर्ष तक पर्वत में छिप कर रहते हुए शंबर असुर का वध किया, जिन्होंने शमन करने वाले शक्तिशाली वृत्र का संहार किया, वे इंद्र हैं. (११)
The one who hid in the mountain for forty years and killed Shambar Asura, who killed the powerful tree that destroyed the destroyer, is Indra. (11)