हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.39.4

कांड 20 → सूक्त 39 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 39
इन्द्रे॑ण रोच॒ना दि॒वो दृ॒ढानि॑ दृंहि॒तानि॑ च । स्थि॒राणि॒ न प॑रा॒णुदे॑ ॥ (४)
इंद्र ने आकाश में प्रकाश करते हुए नक्षत्रों को स्थिर किया है. ये नक्षत्र स्थिर हैं. इन्हें कोई नीचे नहीं गिरा सकता. (४)
Indra has stabilized the constellations while lighting the sky. These constellations are stable. No one can bring them down. (4)