अथर्ववेद (कांड 20)
अ॒पामू॒र्मिर्मद॑न्निव॒ स्तोम॑ इन्द्राजिरायते । वि ते॒ मदा॑ अराजिषुः ॥ (५)
हे इंद्र! तुम्हारा स्तोत्र रस के साथ उच्चारण किया जाता है. यह स्तोत्र वर्षा के जल से सरिताओं और सागर को प्रसन्न करता है. इस से सोमरस पीने के कारण तुम्हारा हर्ष प्रकट होता है. (५)
O Indra! Your hymn is pronounced with juice. This stotra pleases the streams and the ocean with rainwater. Due to drinking someras from this, your happiness appears. (5)