हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.4.3

कांड 20 → सूक्त 4 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
स्वा॒दुष्टे॑ अस्तु सं॒सुदे॒ मधु॑मान्त॒न्वे॒ तव॑ । सोमः॒ शम॑स्तु ते हृ॒दे ॥ (३)
हे उत्तम दान करने वाले इंद्र! मेरे द्वारा दिया हुआ सोम तुम्हारे लिए स्वादिष्ट हो. इस के बाद यह सोम तुम्हारे शरीर के लिए सुख देने वाला हो. (३)
O best donor Indra! The Mon given by me is delicious for you. After this, this Som is going to give happiness to your body. (3)